आशा
जीवन की इस मंथर गति को
पुनः नयी रफ़्तार मिलनी चाहिए |
जीवन के पथ पर केवल पत्थर नहीं
कुछ पुष्प भी मिलने चाहिए |
इस अमावस की अँधेरी रात के बाद
पूर्णिमा की नयी चाँद निकलनी चाहिए |
समस्त जीवन में केवल द्वेष नहीं
प्रेम की बहार भी होनी चाहिए |
मझधार में फसी इस नाव को
पुनः नयी पतवार मिलनी चाहिए |
निराशा के बादलों के पीछे से
आशा की किरण निकलनी चाहिए |
इस विध्वंश के वातावरण में
पुनः निर्माण का वाद्य बजना चाहिए |