Wednesday, June 3, 2020

POEM-2

                                      आशा

जीवन  की  इस  मंथर  गति  को 

पुनः नयी  रफ़्तार  मिलनी  चाहिए | 

जीवन  के  पथ  पर  केवल  पत्थर  नहीं  

 कुछ  पुष्प  भी  मिलने  चाहिए  | 

इस  अमावस  की   अँधेरी   रात  के  बाद 

पूर्णिमा   की   नयी   चाँद  निकलनी   चाहिए | 

समस्त   जीवन  में   केवल   द्वेष   नहीं 

प्रेम   की   बहार  भी   होनी   चाहिए | 

मझधार  में   फसी   इस  नाव   को 

पुनः  नयी   पतवार   मिलनी   चाहिए | 

निराशा  के  बादलों   के   पीछे  से 

आशा   की   किरण   निकलनी   चाहिए | 

इस   विध्वंश   के  वातावरण  में  

पुनः  निर्माण   का   वाद्य   बजना  चाहिए |